बॉर्डर पर अब भी क्यों बैठे हैं?

 -by Nidhi Jain 

कहते हो हमें देश से प्यार है लेकिन वो देखो खेतो में गेहूं, चावल उगाने वाले, सबके अन्नदाता कहलवाने वाले, उमसती घूप में काम करने वाले आज सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं, पिछले छह-सात दिनों से, शीतकालीन में खुले आसमान के नीचे हजारों सख़्या में किसान अपनी मांगों को पूरा करने के लिए यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं जिससे आम लोगों को काफी परेशानी हो रही हैं। सरकार की ओर से लाए गए किसानों के लिए तीनों कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा हैं, कृषक कानून के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, सरकार के असहयोगी विरोध कर रहे है लेकिन मोदी सरकार अपने फैसले पर अटल हैं। सरकार के बनाए गए कानून एक देश एक बाजार से किसान खुश नहीं है। सरकार का कहना है कि अब किसान अपनी उगाइ हुई फसल को कई भी किसी भी राज्य में अपने तय मानक के हिसाब से बेच सकते है, जिसके बाद यह जरूरी नहीं है कि सरकार द्वारा बनाईं गई एपीएमसी में ही किसान अपनी फसल बेचेगा व उपज होने से पहले ही कृषक अपनी फसल का सौदा कर सकते हैं, जिनसे उन्हें ड़र नहीं होगा, चिंता नहीं होगी कि उनकी पैदावार कौन खरीदेगा। एंव तीसरे कानून में यह सशोधन किया गया है कि अब जो जरूरत की चीजें हैं जैसे दाल, चावल, आलू, प्याज आदि उनको एसेंशियल कमोडिटीज से हटा दिया गया है और किसान उतनी ही फसल उगाएगा जितनी उसे जरूरत है जिससे अनाज को स्टॉक नहीं किया जा सकेगा, जिससे अनाज की कालाबजारी पर रोक लग जाएगी। गौरतलब है कि इन तीनों बील को कानून बनाने के लिए बीजेपी की सबसे पुरानी अकाली दल का झगड़ा भी हो गया, मंत्री पद भी छोड़ दिया गया लेकिन किसानो की तमाम कोशिशों के बावजूद भी मोदी सरकार पीछे नहीं हट रही है। प्रदर्शन की तस्वीरें लगातार सामने आ रही है अन्नदाता अपने साथ पूरे चार महीने का सामान लेके आए है उनका फैसला है जब तक सरकार उनकी मांग नहीं मानेगी तब तक वह अपना प्रदर्शन खत्म नहीं करेगे चाहें उन्हें महीनों तक ही क्यों न यहां बैठना पढ़े, सर्दी में वह लोग फ्लाईओवर, गाड़ी के अंदर, ड़ंठी सड़क पर भी बैठने को तैयार है व पंजाब, हरियाणा, राजधानी दिल्ली के बाद वह लोनी बार्डर पर भी प्रदर्शन करने की योजना बना रहे है। यातायात प्रभावित कर वह लोग सड़क जाम कर रहे है, सड़क पर ही सो रहे है, चाय पानी, खाना, पीना सड़क पर ही चल रहा है, महिलाएं किसानों के लिए खाना तैयार कर रही है। कुल मिलाकर एक बात यह है कि किसानों के सवाल का जवाब प्रधानमंत्री मोदी दे चुके हैं कि एमएसपी बंद नहीं होगी व मंड़िया गायब नहीं होगी तो फिर भी नाराज़ किसान दिल्ली के बॉर्डर पर अब भी क्यों बैठे हैं?

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