क्या टूट जाएगी 130 साल की परंपरा
वैश्विक महामारी कोरोना ने विश्व में किस तरह से बदलावा किया है, यह तो तय नहीं किया जा सकता परन्तु यह जरूर तय है कि अब दुनिया पहले जैसी तो नहीं रही। महामारी के बाद लोगों को नई सोच, नए विचार और अधिक खुले पन की जरूरत होगी।
देश की जनगणना होनी एक अहम विषय है क्योकि किसी भी देश अथवा किसी भी क्षेत्र में लोगों के बारे में विधिवत रूप से सूचना प्राप्त करना एवं उसे रेकार्ड करना बहुत आवश्यक है। प्रत्येक देशों द्वारा समय-समय पर अपने नागरिकों की गणना करना, उनके आंकड़े जारी करना कि राज्य या देश में कितने लोग निवास करते है। यह पता लगाना बेहद जरुरी है, और इसी लिए भारत में प्रति दस वर्ष में राष्ट्रीय जनगणना कार्यक्रम चलाया जाता हैं। व देश की पहली जनगणना 1872 यानी अंग्रेजी शासन में शुरू की गई थी, जिसके पश्चात 1881 से लेकर प्रति दस वर्ष के बाद भारत में भी जनगणना करवाई जाती हैं। जिसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों की संख्या की गणना सुनिश्चित करना होता है कयोंकि उसी से विकास की योजनाओं व कार्यक्रमों को सही दिशा दी जाती है। एंव देश की वास्तविक स्थिति के आंकलन यथा आम नागरिकों के जीवन स्तर और उनकी सुविधाओं के स्तर को जानने में भी जनगणना मददगार सिद्ध होती हैं। देश में अंतिम बार जनगणना वर्ष 2011 में की गई थी जो की पंद्रहवीं भारतीय जनगणना थी और इसे सफल आयोजन बनाने में महा पंजी यक जनगणना आयुक्त के अधिकारी सी चंद्रमौली और गृह सचिव जी. के. पिल्लई का अहम योगदान था। मार्च इकतीस को आयोजित राष्ट्रीय स्तर की इस गणना के आंकड़ों के मुताबिक़ भारत 1,21,01,93,422 करोड़ की आबादी के साथ ही संसार का सर्वाधिक आबादी वाला दूसरा बड़ा देश बना था। एंव साल 2001 के संसेक्स और 2011 के संसेक्स की तुलना के बाद यह ज्ञात हुआ था कि भारत की आबादी प्रति दस वर्ष में 18.15 प्रतिशत की दर से बढ़ रही हैं। और संसार के अन्य देशों की तुलना में यह दर काफी अधिक हैं।देश में स्त्री पुरुष संख्या के मध्य का अंतर हर दस साल बाद उत्तरोतर बढ़ रहा हैं, पिछले जनगणना में भारत में पुरुषों की जनसंख्या 62,37,24,248 एवं महिलाओं की जनसंख्या 58,64,69,174 थी। जिससे देश में जनसंख्या की सघनता में व्यापक विविधता देखी गई है। तथा देश के पूर्वी राज्यों में आबादी न्यूनतम है, वहीँ राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र जैसे अन्य कई राज्यों की आबादी विश्व के कई देशों से काफी अधिक हैं। और जनसंख्या के लिहाज से यूपी देश का सबसे बड़ा एवं सिक्किम सबसे छोटा राज्य हैं। व नेशनल पोपुलेशन रजिस्टर के माध्यम से प्रत्येक देश अपने नागरिकों के सम्बन्ध में डेटा एकत्रित करता हैं। एंव केंद्र सरकार जनगणना के कार्य को करवाने के लिए स्कूली शिक्षकों की सहायता से घर-घर जाकर सूचनाएं एकत्रित कर उन्हें व्यवस्थित कर देश के समक्ष प्रस्तुत करती हैं। और आज से पूर्व तक सादे फॉर्म की मदद से घरवार सूचनाएं एकत्रित भी की जाती थी लेकिन अब धीरे-धीरे जनगणना कार्य को डिजिटल आधारित बनाया जा रहा था ताकि ड़ाटा जल्द कलेक्ट किया जा सके और सही आ सकें। एक नागरिक के तौर पर हमारा भी दायित्व है कि, हम जनगणना के समय जो राजकीय कर्मचारी हमारे क्षेत्र अथवा घर आए उन्हें हम सही एव सटीक जानकारी देने के साथ उनके कार्य में भी सहायता प्रदान करें। गौरतलब है कि, इस साल होने वाली जनगणना यानी वर्ष 2021 की जनगणना देश की 16वीं और स्वतंत्र भारत की 8वीं जनगणना होगी और यही देश के नागरिकों के लिए भविष्य की योजनाओं का आधार तय करेगी। व संसार में सांख्यिकी एवं आंकड़े एकत्रीकरण के लिहाज से यह परियोजना देश की सबसे बड़ी योजना होती है। एंव जनगणना की थीम जन भागीदारी से जनकल्याण होती है जिसका प्रथम चरण अप्रैल 2020 में आरम्भ होना था। जिसमे जनसंख्या डेटा के साथ राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का भी अद्यतन किया जाना था।
परंतु इस बार कोविड़-19 के कारण 130 साल की जनगणना की परंपरा टूट सकती है और यह पहली बार होगा 130 साल में जब इस परंपरा पर खतरा मंडरा रहा है क्योंकि दो चरणों में होने वाली जनगणना का पहला काम मवेशियों और घरों की गिनतीयों का काम एक अप्रैल से तीस सितंबर के बीच पूरा होना था, जिसकी अभी कोई संभावना नहीं दिख रही है और अगर कोरोना का कहर इसी तरह अगले साल जनवरी में भी रहा तो दूसरे चरण में फरवरी में होने वाली व्यक्तियों की गिनती का काम भी रुक सकता है। तथा भारत दुनिया के ऐसे गिने-चुने देशों में से हैं जहां 1881 से लगातार हर दस साल में जनगणना होती रही है। ध्यान पूर्वक यह है कि जनगणना के काम को दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भी यानी 1941 में भी नहीं रोका गया था लेकिन मौजूदा हालतों को देखकर अब तो यही लग रहा है कि, इस वर्ष जनगणना नहीं हो पाएगी। और वैसे इस बार गिनतीयों के साथ देश के कई अन्य हिस्सों में असम को छोड़कर नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर यानी एनपीआर को भी अपग्रेड करने की योजना बनाई गई थी।
लेकिन शायद इस बार इन योजनाओं पर अमल नहीं किया जा सकेगा परंतु देश की तरक्की तथा आमजन के सुनहरे भविष्य के लिए सटीक जनगणना का होना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इन्ही आंकड़ों के सहारे हमारे देश की विकास योजनाएं बनाई जाती हैं।
-निधि जैन