अकाल का अलार्म! अनाज हो जाएगा लुप्त
-निधि जैन
मनुष्य, दिन-रात कड़ी मेहनत करता है, खून-पसीना बहाता है, ताकि उसे और उसके परिवार को दो वक्त की रोटी मिल सकें। अपने पेट की आपूर्ति के लिए, इंसान को प्रतिदिन संघर्ष करना पड़ता है।गौरतलब हैै कि हाल ही में एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि आज से ठीक 27 साल बाद समूचे विश्व में, लोगों के सामने एक ऐसा संकट खड़ा होने वाला है जिसमें लोग दो वक्त की रोटी तो छोड़िये, एक वक्त में एक रोटी के लिए भी तरस जाएगें। लाखों करोड़ों के बैंक बैलेंस, कई क्रेडिट और डेबिट कार्ड होने के बावजूद भी, रोटी तक अमीर से अमीर इंसान की पहुंच नहीं हो पाएगी।
द वर्ल्ड काउंट, संस्था की रिपोर्ट ने पूरी दुनिया में अकाल की घोषणा कर दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, पूरे संसार में अनाज का एक ऐसा संकट आने वाला है, जिसमें वर्ष 2050 तक अनाज नाम की चीज दुनिया से लुप्त हो जाएगी।
आज से 27 साल बाद, दाल और रोटी एक दुर्लभ चीज हो जाएगी। वर्ष 2050 तक दुनिया की आबादी 1 हज़ार करोड़ के पार हो जाएगी, जिसके हिसाब से वर्ष 2017 के मुकाबले वर्ष 2050 में 70% अधिक खाने की आपूर्ति होगी। जबकि धरती हर साल 7500 करोड़ टन उपजाऊ मिट्टी खो रही है। देखते ही देखते, मनुष्य ने पृथ्वी की 75 प्रतिशत उपजाऊ भूमि का शोषण कर लिया है तथा आने वाले साल 2030 तक चावल लगभग 130% और मक्का 180% महंगा हो जाएगा। वर्ष 2050 आते-आते पृथ्वी पर खेती करने लायक उपजाऊ भूमि इतनी नहीं रह जाएगी, जिसपर 1 हजार करोड़ लोगों के खाने लायक अनाज पैदा किया जा सके।
अक्सर हम कहते और सुनते हैं कि भविष्य का युद्ध पानी को लेकर होगा लेकिन अनाज का आने वाला यह संकट बताता है कि भविष्य का युद्ध, दाल-रोटी और ब्रेड-कुकीज़ को लेकर भी हो सकता है। गहराते हुए इस संकट को देखते हुए भी, हम खाने की बर्बादी करते है और अगर हम इसी तरह भोजन को बर्बाद करते रहेंगे तो आने वाले समय में हमें कई परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
विश्व का हर एक व्यक्ति हर वर्ष लगभग 121 किलो भोजन बर्बाद करता है और तो और समूचे विश्व में, 93 करोड़ 10 लाख टन अनाज बर्बाद होता है। जिससे यह स्पष्ट है कि भोजन की बर्बादी के लिये दुनिया का हर एक व्यक्ति ज़िम्मेदार है तथा खाने की बर्बादी करने में, वो विकसित देश ज़्यादा आगे हैं जो आए दिन दूसरे देशों में भूख की चिंता जताते रहते हैं।
भारत में हर व्यक्ति साल भर में 50 किलो भोजन जूठा छोड़ता है जबकि इस भोजन की बचत की जाए, तो इस भोजन से कई लोगों का पेट भरा जा सकता है। हमारे देश में ऐसे भी कई लोग है, जिन्हें कई दिनों तक भूखे पेट सोना पड़ता है। बहरहाल हमें समय रहते इस संकट को गंभीरता से लेना चाहिए और इस संकट को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर सख्त कदम उठाने चाहिए।