बिहार के लिए प्रशांत किशोर का वादा... जन सुराज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन, आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के अलावा कांग्रेस के लिए काम कर चुके, पीके के नाम से मशहूर राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर अब किसी भी पार्टी के लिए चुनावी रणनीति नहीं बनाएंगे। सबसे पुरानी पार्टी के कायाकल्प के मिशन के बीच में छूटने के कारण व कांग्रेस में शामिल न होने के बाद, उन्होंने बिहार के पटना के ज्ञान भवन में प्रेस वार्ता करके "जन सुराज" के जरिए, राजनीति में अपनी नई राह की शुरुआत कर ली है।

गौरतलब है कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कांग्रेस में शामिल होने से इनकार करने के बाद अपनी नई पार्टी बनाने का संकेत दिया है। उनका कहना है कि, लोकतंत्र में एक सार्थक भागीदार बनने और जन-समर्थक नीति को आकार देने में मदद करने की मेरी खोज का, 10 साल का सफर काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है और अब, जब मैं पन्ने पलटता हूं तो लगता है कि अब समय आ गया है कि असली मालिक के पास जाया जाएं यानी लोगों के बीच ताकि उनकी समस्याओं को ओर बेहतर तरीके से समझा जा सके और समय रहते "जन सुराज" के पथ पर अग्रसर हो सकें।

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत, अब धीरे-धीरे बिहार में "जन सुराज" को लेकर अपने प्लान का खुलासा कर रहें है व इसके लिए लगातार काम भी कर रहें है एवं विभिन्न तबके के प्रतिष्ठित तथा अपने क्षेत्र में सराहनीय काम करने वाले लोगों में मिलकर उन्हें "जन सुराज" की विचारधारा के बारे में भी बता रहें है। उनका मानना है कि, राज्य बिहार को नई सोच के साथ बदलने की जरूरत है। 

हालांकि यहां के निवासियों में, यहां की समस्या को सुलझाने की क्षमता तो है, बिहार को बदलने का जज्बा तो है, लेकिन उसके लिए उन लोगों को साथ लाने का प्रयास करना है, जो काम प्रशांत कर रहें है और वैसे भी जो लोग यहां के सामाजिक और राजनीतिक जमीन से जुड़े हुए हैं वो यहां की व्यथा बेहतर समझा सकते है क्योंकि उनहोंने उसको करीब से महसूस किया है और इस सराहनीय प्रयास के लिए उनका लक्ष्य है, बिहार को बदलने की सोच रखने वाले 17 हजार से अधिक लोगों को जोड़ना व उन सभी से चर्चा करना और अगर उनमें से अधिकांश की राय बनती है तो ही किसी संगठन या पार्टी का गठन किया जाएगा। चूंकि प्रशांत किशोर खुद, पार्टियों के लिए रणनीति बनाने में माहिर हैं, ऐसे में ये साफ है कि अगर वह खुद की राजनीतिक पार्टी बनाते है तो वो पूरी तरह से आधुनिक पार्टी होगी।

बिहार को उन्नति व प्रगति की राह पर ले जाने के लिए प्रशांत, हर मुमकिन कोशिश करने को तैयार है तथा इसी कड़ी में उन्होंने 3 हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा का भी ऐलान कर दिया है। जिसकी शुरुआत 2 अक्टूबर से गांधी आश्रम, पश्चिमी चंपारण से होगी। 8 महीने से एक साल के भीतर इस यात्रा को पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है। 

गौरतलब है कि, अधिकांश बार ये देखा भी गया है कि लोगों के पास सुझाव व योजनाएं तो होती है पर उसको अमल करने के लिए जमीनी स्तर पर प्लैटफार्म नहीं होता है, जो अब प्रशांत किशोर के जरिए आम लोगों को मिलेगा। राजनैतिक परिवार से नहीं होने के बावजूद भी अपनी एक नई राजनैतिक पहचान बनाने का मौका पी के, अपने साथ मिलकर काम करने वाले लोगों को दे रहें है। लगातार कई महीनों से, ऐसे 17 हजार से अधिक लोगों को चिह्नित किया जा रहा है। जो प्रशांत के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं और "जन सुराज" की विचारधारा को आगे बढ़ाना चाहते है और अमल में लाना चाहते है। वह व्यक्तिगत रूप से उन लोगों से मिल रहें है व "जन सुराज" की अपनी परिकल्पना को उन्हें बता रहें है, उनके विचार, प्रतिक्रिया और समालोचना को ध्यानपूर्वक सुन रहे हैं क्योंकि यह वही लोग है जो वास्तव में बिहार में बदलाव लाना चाहते हैं। उनका मानना है, जब तक बिहार के लोग मिलकर इस सोच के पीछे ताकत नहीं लगाएंगे तब तक बिहार की दशा और दुर्दशा ठीक नहीं हो सकती है। 

बहरहाल, 30 वर्षों के कार्यकाल में, बिहार में लालू प्रसाद और नीतीश कुमार की सरकार ने कई नई परियोजनाओं को आह्वान दिया, कई नए फैसले लिए जनता के हित में लेकिन फिर भी बिहार, विकास के अधिकांश मानकों पर देश में सबसे पीछे है। बिहार में शिक्षा और स्वास्थ्य की व्यवस्था ध्वस्त है। जिससे जनता परेशान है, और इसको सुधारने के लिए, बिहार में एक नई व्यवस्था बनाने की जरूरत है। जिसका प्रयास प्रशांत किशोर कर रहें हैं परन्तु बिहार को बदलने के लिए एक नई सोच और प्रयास ही केवल काफी नहीं है, जब तक यहां के लोग खुद, "जन सुराज" की विचारधारा के सफलता के लिए सामूहिक प्रयास नहीं करेंगे। इसलिए लोगों का सामूहिक साथ अति आवश्यक है किसी भी विचारधारा एवं उद्देश्य को सफलतापूर्वक पूर्ण करने के लिए।

 - निधि जैन

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