दुनियाभर में, ट्विटर अब चीन की इमेज ब्रैंडिंग करेंगा?

 -By Nidhi Jain

21 मार्च 2006, करीब 16 साल पहले सैन फ्रांसिस्को में ट्विटर की स्थापना की गयी थी। जिसको अगले ही साल मार्च 2007 में 'बेस्ट स्टार्टअप' का अवार्ड भी मिल गया।

प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने वाले एक साधारण से व्यक्ति, जैक डोर्सी जो रोजाना की तरह ही अपने दो दोस्तों के साथ बार में बैठ कर बातचीत कर रहें थे, तो अमुसी समय बातचीत के दौरान तीनों दोस्तों ने एक ऐसी माइक्रो ब्लॉगिंग साइट बनाने की योजना बनाई, जिसके जरिए लोग एक दूसरे के साथ जुड़ सकें और अपने विचार साझा कर सकें और कड़ी मेहनत के बाद उनकी ये योजना ट्विटर के रूप में सामने आई एवं तब से लेकर अब तक ट्विटर के एक्टिव यूजर्स की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।
वर्ष 2021 में ट्विटर के एक्टिव यूजर्स की संख्या बढ़ कर लगभग 40 करोड़ हो चुकी है, जिनमें से सबसे ज्यादा, 7 करोड़ 30 लाख यूजर्स अमेरिका के हैं। इसके बाद, जापान में इसके 5 करोड़ 55 लाख यूजर्स हैं तथा भारत में ट्विटर को उपयोग करने वाले लोगों की संख्या 2 करोड़ 21 लाख है। दुनिया के विभिन्न कलाकार, नेता एवं खिलाड़ी इत्यादि, सब ट्विटर पर हैं। यहां तक की इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली कंपनी टेस्ला के सीइओ, माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर को खरीदने वाले मालिक, एलन मस्क भी लंबे समय से ट्विटर का प्रयोग कर रहें है और विभिन्न मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया देते रहते हैं।
मस्क ने ट्विटर को खरीदने के लिए 44 बिलियन डॉलर, यानी करीब तीन लाख 36 हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं। डील के अनुसार, मस्क को ट्विटर के हर शेयर के लिए 54.20 डॉलर यानी करीब 4,150 रुपये चुकाने होंगे। हालांकि मस्क के पास, पहले से ही ट्विटर की 9.2% की हिस्सेदारी थी, लेकिन अब वो इस माइक्रो ब्लॉगिंग साइट के अकेले मालिक बन चुके हैं। इस डील के बाद, कंपनी में पूरी अर्थात 100 प्रतिशत हिस्सेदारी मस्क की होगी। जिसका मतलब है, टेस्ला की तरह ट्विटर भी अब एलन मस्क की प्राइवेट कंपनी बन चुकी है।
लेकिन ध्यानपूर्वक बात यह है कि दुनिया के सबसे अमीर आदमी को ट्विटर जैसी कंपनी में ऐसा क्या दिखा कि वो इसे खरीदने के पीछे पड़ गए क्योंकि लंबे वक्त से ट्विटर की बैलेंसशीट बेहद खराब चल रही है और इस कंपनी ने अधिकतम समय, घाटा ही उठाया है, परन्तु इसके बावजूद भी मस्क ने ट्विटर के लिए इतनी बड़ी रकम खर्च कर दी, आखिर क्यों?
बहरहाल, बात करीब साढ़े चार वर्ष पुरानी है। साल 2017, 21 दिसंबर रात करीब 11 बजकर 20 मिनट पर टेस्ला के फाउंडर एलन मस्क ने एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था- 'आई लव ट्विटर'। जिसका जवाब देते हुए, अमेरिकी पत्रकार डेव स्मिथ ने कॉमेंट किया और पूछा, फिर आप इसे खरीद क्यों नहीं लेते? जिसका उत्तर, मस्क ने भी दिया और उनसे पूछा, इसकी कीमत कितनी है? जिसके बाद से ही अंदेशा लगाया जा रहा था कि शायद ही जल्द, मस्क ट्विटर को खरीद सकते है और ठीक, इस ट्वीट के 52 महीने बाद, 26 अप्रैल 2022 को एलन मस्क ने ट्विटर को खरीद लिया। हालांकि इससे पहले एलन ने 4 अप्रैल, 2022 को पहली बार ट्विटर में 9.2 प्रतिशत शेयर खरीदने की जानकारी दी थी और लगभग 10 दिन बाद, ट्विटर को पूरी तरह खरीदने का ऑफर दिया था। जिस ऑफर को, ट्विटर के शेयर होल्डर्स में से एक, सऊदी प्रिंस अल वलीद बिन तलाल ने ठुकरा दिया था, परन्तु 10 दिन तक बैठकें करने के बाद, ट्विटर का बोर्ड मस्क का ऑफर ठुकरा नहीं सका और ट्विटर के नए मालिक बन गए, एलन मस्क।
एलन ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया देते रहते है। लगभग दो सप्ताह पहले ही, एलन ने कहा था कि ट्विटर में जबरदस्त क्षमता है, जिसके लिए उसे अनलॉक किए जाने जाने की जरूरत है। जिसके लिए बेश्क ही मस्क के पास कोई योजना होगी ही। कोई तो योजना एलन के दिमाग में चल रहीं होगी, जिसके जरिए वो ट्विटर को एक घाटे वाली कंपनी से मुनाफा कमाने वाली कंपनी में बदल देंगे। वैसे, मस्क खुद को फ्रीडम ऑफ स्पीच का बड़ा पक्षधर बताते हैं। ट्विटर ने जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रम्प के ट्विटर अकाउंट को बैन कर दिया था, तब भी एलन ने इसका विरोध किया था और कहा था कि वो इस प्लेटफॉर्म को सुधारना चाहते हैं। यही नहीं, इसी वर्ष 25 मार्च को मस्क ने ट्विटर पर एक चुनाव करवाया था, जिसमें उन्होंने सवाल पूछा था कि क्या- ट्विटर, फ्री स्पीच यानी अभिव्यक्ति की आजादी का ठीक तरह से पालन कर रहा है? जिसके जवाब में 70% से ज्यादा लोगों का जवाब था नहीं। मस्क का मानना हैं कि फ्री स्पीच सबके लिए बहुत आवश्यक है और लोगों को कानून का पालन करते हुए अपने नजरिए को सबके सामने रखना चाहिए।
इसी के साथ, मस्क ट्विटर में एक और बड़ा बदलाव कर सकते है। उन्होंने, ट्विटर पर ही एक पोल के जरिए लोगों से सवाल पूछा था कि क्या वो इस सोशल नेटवर्किंग साइट्स में एडिट बटन का ऑप्शन देखना चाहते हैं, जिसकी मांग लंबे समय से चल रहीं है। असल में, एक बार जो ट्विटर पर लिख कर पोस्ट कर दिया जाता है उसे ऑनलाइन एडिट करने की या उसमें बदलाव करने की कोई व्यवस्था नहीं है, हालांकि ट्वीट को डिलीट किया जा सकता है लेकिन बदलाव नहीं। फेसबुक समेत कई अन्य दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन कंटेंट को एडिट करने का ऑप्शन देते हैं इसीलिए उम्मीद है कि अब मस्क इसमें ये बड़ा बदलाव कर सकते हैं। इसी के साथ मस्क, ट्विटर की कुछ सर्विसेज को भी पेड करने पर भी विचार कर रहे हैं। जिसका संकेत उनके एक ट्वीट से भी मिलता है। एलन मस्क ने 9 अप्रैल 2022 को एक ट्वीट किया था जिसमें दुनिया के सबसे अधिक फॉलोअर्स वाले टॉप 10 ट्विटर हैंडल के नाम थे। इस लिस्ट को रिट्वीट करने के बाद मस्क ने लिखा कि इनमें ज्यादातर लोग कभी-कभार ही पोस्ट करते हैं और बहुत ही कम कंटेंट डालते हैं। जिसके बाद उन्होंने एक दूसरा ट्वीट किया और कहा कि ट्विटर को ब्लू सब्सक्राइबर्स से, कुछ भुगतान लेना चाहिए।
तथा इसी के साथ ये भी कहा जा रहा है कि, एलन मस्क ने ट्विटर को पैसे के लिए नहीं बल्कि प्रभाव के लिए खरीदा है। मस्क का कहना है कि उन्होंने कारोबार करने के मकसद से ट्विटर को नहीं खरीदा है बल्कि वो इस सोशल मीडिया प्लेटफार्म को खरीद कर ये सुनिश्चित करना चाहते हैं कि दुनिया में ट्विटर का इस्तेमाल करने वाले लोगों को इसके माध्यम से अभिव्यक्ति की आजादी मिलती रहे और वो अपने विचार और अपनी बात दुनिया तक पहुंचाते रहें।
हालांकि, एलन मस्क के ट्विटर के मालिक बनने के बाद, ट्विटर के कई कर्मचारियों की नौकरी सिर्फ 6 महीने तक ही सुरक्षित है क्योंकि 6 महीने बाद एलन मस्क, ट्विटर को पूरी तरह टेकओवर कर लेंगे यानी ट्विटर के कर्मचारियों को अपना भविष्य अंधेरे में दिख रहा है। यहां तक की ये भी अटकले लगाई जा रही है कि 5 महीने पूर्व बनें, ट्विटर के सीईओ पराग अग्रवाल भी ट्विटर को अलविदा कह सकते है लेकिन अगर पराग को ट्विटर से 12 महीने पहले हटाया जाता है, तो मस्क को ये काफी महंगा पड़ेगा। पराग को हटाए जाने पर कम्पनी को उन्हें 42 मिलियन डॉलर यानी, करीब 321 करोड़ रुपये देने पड़ेंगे परन्तु ट्विटर के दूसरे कर्मचारियों की किस्मत इतनी अच्छी नहीं है।
गौरतलब है कि एलन मस्क ने ट्विटर को घाटे में होने के बावजूद भी इसलिए खरीदा है, क्योंकि वो इसकी सॉफ्ट पॉवर को जानते हैं। वह अच्छे से जानते हैं कि अगर ट्विटर का नियंत्रण उनके हाथों में आ गया तो वो दुनिया के बड़े-बड़े इन्फ्लुएंसर और ब्लू टिक वाले लोगों को आसानी से प्रभावित कर पाएंगे और वैसे भी ट्विटर का प्रभाव, उसके बिजनेस के साइज और यूजर्स की संख्या से काफी बड़ा है। ये प्लेटफॉर्म, लोगों को एक ऐसा मंच देता है, जहा खबरें भी ब्रेक होती हैं और नैरेटिव भी गढ़े जाते हैं और यही बात है, जो ट्विटर को एक शक्तिशाली टूल के रूप में स्थापित करती हैं। ट्विटर से किसी भी देश की सरकार के खिलाफ अभियान चलाया जा सकता हैं। मस्क ये भी जानते हैं कि वो ट्विटर की सहायता से दुनिया के छोटे-बड़े सभी देशों की सरकारों को इसकी क्षमता से हासिल कर सकते हैं एवं इस प्लेटफॉर्म का उपयोग, अपनी नीतियों और बिजनेस मॉडल को लागू करने के लिए कर सकते हैं।
बहरहाल, एलन मस्क के इस फैसले से कई बड़ी हस्तियां भी खुश नहीं है। यहां तक की विश्व के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति और ऐमेजॉन के सीईओ जेफ बेजोस ने भी एलन मस्क के ट्विटर खरीदने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मस्क के चीन कनेक्शन का जिक्र करते हुए इस डील पर सवाल उठा दिए है।
क्योंकि मस्क की टेस्ला कंपनी, जो इलेक्ट्रिक कारें बनाती है, उसका दूसरा सबसे बड़ा बाजार चीन में है। साल 2021 में अमेरिका के बाद टेस्ला ने अपनी सबसे ज्यादा गाड़ियां चीन में ही बेचीं थी। चीन में टेस्ला के कई मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी हैं जिसके लिए चीन की सरकार ने मस्क को भरपूर मदद भी दी है। जैसे- विभिन्न तरह की सब्सिडी, टैक्स में छूट तथा सस्ती दरों पर कर्ज आदि। यही नहीं टेस्ला की कारों में जो बैटरी यूज होती है, उसका सबसे बड़ा सप्लायर भी चीन ही है। जिससे ये स्पष्ट अंदेशा लगाया जा सकता है कि चीन और मस्क के कारोबारी रिश्ते एक दूसरे के सहयोग पर ही टिके हुए हैं। हालांकि इस समय तो चीन ने ट्विटर पर बैन लगा रखा है, परन्तु अब सोशल मीडिया पर लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या एलन अब, अपने कारोबारी पार्टनर चीन का ध्यान रखेंगे? क्या, अब ट्विटर दुनियाभर में चीन की इमेज ब्रैंडिंग का काम तो नहीं करने लगेगा? कहीं अब एलन मस्क, ट्विटर को अपनी निजी फायदों के लिए इस्तेमाल तो नहीं करेंगे?

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