पालघर के साधुओं को इंसाफ कब?

 -by Nidhi jain 

आज 200 दिन से भी अधिक हो चुके है लेकिन अभी तक महाराष्ट्र के पालघर में 16 अप्रैल को हुई दो साधुओं और एक ड्राइवर की हत्या के गुनहगारों को सजा नहीं मिली है. पालघर जिले के कासा इलाके में उस रात चोरी के शक में 70 साल के कल्पवृक्ष गिरी, 35 वर्ष के सुशील गिरी व 30 साल के उनके ड्राइवर नीलेश तेलगाडे, जो कि ओमानी वैन से सूरत जा रहे थे, तो तब उन्हें पालघर से 100 किलोमीटर दूर स्थित गढ़चिंचले गांव में भीड़ ने उनकी गाड़ी से बाहर खींच लिया और इसके बाद, उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. गौरतलब है कि पालघर जैसी घटना महाराष्ट्र के औरंगाबाद में भी हुई है. जहां प्रियशरण महाराज के आश्रम में घुसकर 7 से 8 अज्ञात लोगों ने उन पर हमला किया था. जिसका अभी तक इंसाफ नहीं हुआ है. रोजाना ऐसे कई अपराध होते हैं जिनमें मासूम लोगों की हत्या हो जाती है. वो लोग इन्साफ के लिए हर संभव प्रयास करते है, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद भी उन्हें न्याय नहीं मिलता हैं. हालांकि वारदात के कुछ दिन बाद ही मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के कार्यालय की ओर से जारी बयान में यह बताया गया था कि पुलिस ने साधुओं की हत्या के सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. लेकिन क्या हकीकत में साधुओं के गुनहगारों को उनकी करनी की सजा मिली या उन्हें भी किसी राजनेता ने बचा लिया, जैसे अधिकांश केसों में होता हैं. वैसे पुलिस का कहना है कि इस मामले में 110 लोगों को गिरफ्तार किया गया था जिनमें से 101 आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था जबकि 9 नाबालिगों को सुधार गृह भेजा गया था. लेकिन सवाल तो यह उठता है कि क्या सिर्फ कार्रवाई करने से दोनों साधुओं और उनके ड्राइवर की आत्मा को शांति मिल जाएगी??? उन बाल स्वभाव वाले सीधे साधे साधु संतों का क्या कुसूर था जिनकी हत्या पुलिस के सामने निर्दयता से कर दी गई. सात महीने बीत जाने के बाद भी अगर उनको न्याय नहीं मिलता है तो क्या उनकी आत्मा कभी हमें माफ कर पाएगी???
बहरहाल 2 संत और उनके ड्राइवर को बड़े ही बेरहमी से लिंचिंग कर मौत के घाट उतार दिया गया जिस पर सारे लिबरल खामोश हैं. इस अपराध और शर्मनाक कृत्य के अपराधियों को कठोर दण्ड अवश्य ही मिलना चाहिए। आखिरकार उन साधुओं की गलती ही क्या थी, कि उनकी इतनी बेरहमी से हत्या कर दी गई, उन्को इन्साफ कब मिलेगा, उनकी आत्मा को शांति कब मिलेगी???

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