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क्यां 7 खून माफ किए जा सकते हैं?

 क्या देरी से मिले न्याय को सच में न्याय माना जा सकता है? वर्षों की देरी के बाद अगर कोर्ट कानूनी तरीके से सही फैसला भी लेती है, तो कई न कई देरी की वजह से कई जीवन अवश्य ही प्रभावित हो जाते हैं। बहरहाल स्‍वतंत्र भारत में यानी वर्ष 1947 के बाद पहली बार किसी महिला को फांसी होने वाली है और एक मासूम बेटा है, जो अपने लिए मां का हक मांग रहा है। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में जहां शबनम नाम की एक लड़की ने अपने परिवार के सभी 7 लोगों की हत्या कर दी थी क्योंकि, वो अपने प्रेमी से शादी करना चाहती थी और घर वाले शादी के खिलाफ थे। शबनम को लगा कि अगर वह अपने घर वालों को रास्ते से हटा दे तो शादी भी हो जाएगी और घर की संपत्ति पर भी उसका कब्जा हो जाएगा,  जिससे वो अपनी जिंदगी आराम से गुजार लेगी लेकिन शबनम अपराध के बाद अपने प्रेमी के साथ गिरफ्तार कर ली गई और उन दोनों को 2010 में अमरोहा की अदालत ने फांसी की सजा सुना दी थी।अदालत के इस मामले को अब लगभग 13 वर्ष बीत चुके हैं। शबनम ने दिसंबर 2008 में जेल में एक बेटे को जन्म दिया था। जिसके बाद अब ये कहानी उस बच्चे की भी है। वो बच्चा चाहता है कि देश का कानू...

आत्मनिर्भरता जुडा ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी से

 -By Nidhi jain  भारत पूरे विश्व में अपनी मेहनत के बल से लोहा मनवा रहा है। जिसे समूचे विश्व में भारत की छवि बढ़ती जा रही है और अब एक बार फिर ऐसा हुआ है। ऑक्‍सफॉर्ड ने अपने हिंदी के शब्‍दों में एक और नया शब्‍द जोड़ दिया है। जो है आत्‍मनिर्भरता। इस शब्‍द का जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई 2020 को सार्वजनिक तौर पर उस वक्‍त किया था जब देश वैश्विक कोरोना महामारी की चपेट में था और वो इससे उबरने के लिए एक आर्थिक पैकेज की घोषणा कर रहे थे। हालांकि इसके बाद यह शब्‍द काफी प्रचलित हुआ और चर्चा का विषय बन गया था। पीएम मोदी ने उस वक्‍त देश को हर क्षेत्र में आत्‍मनिर्भरता बनाने का जो जिक्र किया था वो भविष्‍य के लिए भारत को एक मजबूत आधार देने की कल्‍पना थी, जो अब साकार होती हुई दिखाई दे रही है। जब पीएम मोदी ने इसका पहली बार जिक्र किया था तो तब उस वक्त उन्‍होंने 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज का एलान किया था, जो देश के जीडीपी का करीब दस फीसद था। प्रधानमंत्री ने आत्‍मनिर्भरता भारत के तहत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों के उत्‍थान के लिए 16 घोषणाएं की थीं। जिनमें किसानों की आय क...

विदेशी ताकतों का अधिप्रचार

 -By Nidhi jain  किसान आंदोलन अब सिर्फ हमारे देश में ही नहीं बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी तूल पकड़ रहा हैं। जिसमें कई राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ बोलीवुड से लेकर विदेशों की जानी मानी हस्तियाँ अपना उल्लू सीधा कर रही हैं। आलम तो यह है कि दुनिया की इन तीन बड़ी शख्सियतों में इतनी असमानताएं हैं कि इन्हें किसी एक विषय पर साथ देखने के बारे में पहले कभी सोचा ही नहीं जा सकता था लेकिन किसान आंदोलन ने इन तीनों को एक साथ ले आया और जिससे यह बात साबित होती है कि इस आंदोलन के पीछे बहुत बड़ी ताकत का हाथ है। इनमें पहली रिआना है, जो अमेरिका की मशहूर पॉप सिंगर हैं। दूसरी स्वीडन है, जो कि पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग की है और तीसरी एडल्‍ट फिल्‍म इंडस्‍ट्री में काम कर चुकी अमेरिका की एक मॉडल मिया खलीफा की है इन तीनों ने किसान आंदोलन का समर्थन किया है। चाहें वो भारत में अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए किया है या फिर किसी ओर कारण वर्ष जिसका पता तो समय आने पर ही पता चलेगा। अवश्य ही यह रहस्यमय ताकत कितनी बड़ी है कि इसकी साजिश कितनी खतरनाक होगी इसका तो अंदाजा हम लगा ही नहीं सकतें।उल्लेखनीय है ...

सच कब तक छुपाया जाएगा?

-By Nidhi Jain  बेशक़ ही लोकतंत्र की सफलता या विफलता उसकी पत्रकारिता पर निर्भर करती है लेकिन जिस तरह से अब विश्व में निष्पक्ष पत्रकारिता दिखाने और बताने पर प्रतिबंध लगता जा रहा है वो बिलकुल भी जायज़ नहीं है बहरहाल कहते है न असली ताकत मुसीबत में ही क्यों न हो लेकिन वह अपने देश के बारे में सोचने से, मरते दम तक अपना कर्तव्य निभाने में ड़रती नहीं है, पत्रकार मनदीप बिल्कुल इस बात पर खड़े उतरे हैं, पुलिस जीप के अंदर से ये नहीं कहा कि मेरी जान को ख़तरा है, बल्कि कहा भी तो "FreePress"। जो बेशक़ काबिले तारीफ़ है। ये दिखाता है कि पत्रकारिता के लिए अभी भी कुछ लोगों में सच्चाई, साफ नियत और जुनून बाकी हैं। कुछ लोग जमीन को आसमान और आसमान को जमीन समझते हैं परन्तु इनके अंतर्मन में स्वतंत्र विचारों को बेड़ियों से जकड़ने की उत्कंठा होती है। किसी पत्रकार के स्वतंत्र विचार कभी कैद नहीं किए जा सकते हैं व हुक्मरानों को प्रेस की मर्यादा का उल्लंघन करने से बचना चाहिए। आलम तो यह है कि सरकार मनदीप पुनिया पर केस बनाने को तैयार है एंव उसे मारेंगे और पीटेंगे लेकिन दीप सिद्धू के नाम पर दिल्ली पुलिस के ...

किसान त्रस्त

 -by Nidhi jain  कोरोना वायरस के सुरक्षा उपायों के बीच देश की राजधानी दिल्‍ली में 72वीं गणतंत्र दिवस परेड में बीते दिनों कुछ चीजें पहली बार देखने को मिलीं, इसमें केंद्र शासित क्षेत्र लद्दाख की झांकी और कोविड-19 की महामारी पर केंद्रित झांकी सबके बीच चर्चा का विषय बनीं। कोरोना महामारी के बीच इस बार की छोटी और कम प्रतिभागियों वाली परेड और कम मेहमान के बीच इन झांकियों में भारत की संस्‍कृति और क्षमता का चित्रण देखने को मिला। वर्ष 2020 में देश सहित पूरी दुनिया ने कोरोना संक्रमण की महामारी का सामना किया, इसकी झांकी भी इस बार परेड में दिखाई दी। हालांकि यह देश में विकसित की गई कोरोना वैक्‍सीन के लिए भी जाना जाएगा। गौरतलब है कि जहां देश में गणतंत्र दिवस का जश्न मनाया जा रहा था तो वहीं दूसरी तरफ किसान आंदोलन ने देश के अहम दिन को शर्मसार साबित कर दिया। बेशक यह किसान आंदोलन आंदोलन नही रहा बल्कि आरजकता में तब्दील हो गया था। उर्ग किसानों ने दिल्ली में लाल क़िले के ऊपर चढ़कर प्रदर्शन किया व उत्पात कंट्रोल से बाहर हो गया था। बहरहाल यह जय जवान- जय किसान कहने वाला देश है लेकिन जवानों की किस...

अच्छी नहीं दोस्ती प्लास्टिक के साथ!

-By Nidhi Jain  अब तो इंसानों का हठ प्रकृति के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। इंसान इतने जिद्दी हो चुके हैं कि वो लाख मना करने पर भी प्रदूषण फैलाने से बाज़ नहीं आ रहें और इसी का नतीजा यह हुआ है कि अब प्रदूषण ऐसी जगह तक पहुंच गया है, जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते। इस वक्त पृथ्वी पर प्लास्टिक का कचरा सबसे बड़ी समस्या बन चुका है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़ वैज्ञानिकों ने गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के गर्भ में माइक्रो प्लास्टिक की पहचान की है। माइक्रो प्लास्टिक 5 मिलीमीटर से भी कम आकार के प्लास्टिक या फाइबर के छोटे छोटे टुकड़े होते हैं। गौरतलब है कि जो प्लास्टिक अब तक समुद्र, हवा, पानी और खाने में मिलती थी, वो अब मां के गर्भ तक पहुंच चुकी है। जो अवश्य ही चिंता पूर्ण विषय है। इस रिसर्च में कुल 6 महिलाओं को शामिल किया गया था। जिनमें से चार महिलाओं की गर्भनाल में नीले, लाल और गुलाबी रंग के प्लास्टिक के कण मिले हैं। गर्भनाल महिलाओं के शरीर का वह अंग होता है, जिससे गर्भावस्था के दौरान बच्चे को ऑक्सीजन और ज़रूरी पोषण मिलते है। वैज्ञानिकों का मानना है कि पेंट्स, कॉस्मेटिक और पर्सनल केयर प्रोडक्...

इशक भी अब जिहाद हो गया!

-By Nidhi Jain  हर किसी को अपनी मर्ज़ी से प्रेम करने, शादी करने और अपने धर्म को मानने की आज़ादी होनी चाहिए और यह आज़ादी शादी के बाद भी जारी रहे तभी वह सच्चा प्रेम है व अगर धर्म से ऊपर उठ कर प्रेम कर सकते हैं तो एक दूसरे के धर्म को स्वीकार क्यों नहीं कर सकते? जब सब धर्म एक समान हैं तो फिर एक को बदलना क्यों? बहरहाल यूपी और उत्तराखंड में लव जिहाद कानून के मामले में हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी व इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाएं स्‍वीकार करते हुए दोनों राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा है। यूपी में अभी यह सिर्फ एक अध्यादेश है, जबकि उत्तराखंड में यह 2018 में कानून बन चुका है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में लव जिहाद कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति किसी को लालच देकर, भटकाकर या डरा-धमकाकर धर्म बदलने को मजबूर करता है तो उसे पांच साल तक की सजा हो सकती है लेकिन शर्मनामक तो यह है कि कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि इस कानून के जरिए पुलिस और सरकार प्रेम करने वाले लोगों और अपने मां बाप की मर्ज़ी...