आंखें खोलते ही जिन्होने खो दिया अपनों का साथ। उठ गया मां बाप का साया, रहा ना सर पर किसी का हाथ। उनका क्या बिगाड़ेगा ग़मों का सैलाब। जिन्होंने पैदा होते ही खो दिया अपना बचपन। एकदम सूखी डाली के टूटे बिखरे पत्तों जैसा होता है मासूम अनाथ बच्चों का बचपन। जिन्होने ख्वाबों की बस्ती में कुछ कर गुजर जाने के देखे होते है ख्वाब। आंखों में चमक होती है, पर खाने को दाना नहीं होता। सही गलत बताने को कोई साथ नहीं होता, क्योंकि इन्हें किसी ने पाला नहीं होता। ममता के प्यार से दूर, पापा की डांट से दूर होते हैं यह बच्चें। शायद रुठ गई है, इनकी मंजिल इनसे। कड़वा सत्य है, पर सच है इन अनाथों का कोई ठिकाना नहीं होता। कहने को तो देश भर में कई बाल आश्रम है पर इन मासूम अनाथ बच्चों का अपना घर कहने के लिए कोई घर भी नहीं है। बीते दिनों कई ऐसे केस सामने आय जहां अनाथ आश्रम में रहने वाले बच्चों के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है, उन्हें लाठी-ड़ंड़ो से मारा जाता है, खाने के लिए खाना नहीं दिया जाता। जिससे अधिकतर बच्चो में कुपोषण के कारण कई बिमारियों ने जन्म लिया है। व इन बच्चों के देखभाल की भी जिम्मेदारी वहां के अधिकारी सही से नहीं निभा रहे हैं। जिनके खिलाफ सरकार को जल्द से जल्द सख्त कदम उठाने चाहिए। ताकि उन मासूम बच्चों की भी जिंदगी संवर जाए।हालांकि ऐसे मामले हमारे देश मे अनगिनत है लेकिन जिन बच्चों को उनका धर्म, जाति देश भी तक नहीं पता।जिन्हें शायद सरहदों के मायने भी नहीं पता होते। उन लोगों के साथ कोई इतना दुर्व्यवहार कैसे कर सकता है।हम सभी यह बात भली भांति जानते है कि अनाथ आश्रमों में बच्चों की परवरिश, उनका रहन-सहन, पढ़ाई-लिखाई और स्वास्थ्य का ध्यान किस प्रकार रखा जाता है। रेलवे स्टेशन, फुटपाथ, बस अड्डों पर पाए जाने अनाथ बच्चों को जब कोई भी सहारा नहीं होता तो तब शायद स्थानीय प्रशासन उन्हें अनाथ आश्रमों में छोड़कर चले जाते है। पर इन सबके बावजूद भी हमारे देश में कई ऐसी जगह हैं, शहर है जहां पर उन अनाथ बच्चों को अपना कहने वाला कोई नही है। जब उन मासूम बच्चों को अपनों की याद आती होगी तो उनके मासूम चेहरों पर आंसुआें की जैसी झड़ी लग जाती होगी। शायद वह भी सोचते होंगे अगर हमारे सर पर माँ-बाप का साया होता तो हमारा भी घर होता यूं हमें फुटपाथ पर सोना नहीं पड़ता। शायद तन पर अंगोछा नहीं, महंगा सा वस्त्र होता। शायद पढ़ने के लिए भी स्कूल होता। घूमने-फिरने के लिए अच्छी सी कार होती। परिवार का प्यार होता। होली-दीवाली जैसे त्यौहार होते। इस तपती गर्मी में शायद ए.सी का सुख होता। शायद तुम होते तो इस देश में मेरा भी सम्मान होता, मेरा भी रुतबा होता। मैं यूं इस तरह किसी पर बोझ नहीं होता। बस दिल में एक ही दुआ होती, अगर मम्मी-पापा आप होते तो शायद मुझे इस समाज में भीख का एहसास नहीं होता व मुझे आपकें ना होने के परिणामों का बोध नहीं होता। -निधि जैन
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण समूचे विश्व प्रभावित है। चीन के वुहान शहर से जन्मा कोरोना दुनिया भर में हड़कंप मचा रहा है। यह पहला ऐसा वायरस है, जिसने सबके दिल और दिमाग में खौफ भर दिया है। यह ऐसी संकट की घड़ी है, जिसके बारे में किसी ने कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसे भी दिन आ जाएंगे कि लोग घरों में रहने के लिए विवश हो जाएंगे।
यह भारत में पहला ऐसा मौका आया है जब मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च, ऑफिस, कारखाने, दुकाने, फैक्ट्रियां इत्यादि इतने ज्यादा दिनों के लिए बंद हुई हैं। और अभी भी कुछ नहीं पता की यह वायरस का प्रकोप भारत में कब खत्म होगा क्योंकि प्रतिदिन कोरोना संक्रमितों के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं। जिसके कारण ही सरकार को बार-बार लॉकडाउन घोषित करना पड़ रहा है।
लॉकडाउन-1, लॉकडाउन-2, अनलॉक-1 इत्यादि के फार्मूले सरकार अपना रही है। जिसके बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार ने वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए एक ओर नए प्लान पर काम शुरू कर दिया है। अब यूपी सरकार कोरोना से निपटने के लिए वीकेंड लॉकडाउन फॉर्मूला लागू कर रही है। कोविड़-19 के संक्रमण को रोकने के लिए अब यूपी में हर हफ्ते वीकेंड लॉकडाउन लगेगा। यानी शनिवार और रविवार को लॉकडाउन रहेगा। जिसके मुताबिक सभी बाजार और दफ्तर भी बंद रहेंगे। इसका मतलब प्रदेश में सभी बाजार और दफ्तर हफ्ते में केवल पांच दिन ही खुलेंगे। कोरोना संकट से निपटने के लिए यह नया प्लान लागू करने का फैसला ले लिया गया है। वीकेंड पर लॉकडाउन लगाने का यह फैसला सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई टीम इलेवन की बैठक में लिया गया है। व वायरस के संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए ट्रांसमिशन चेन तोड़ने के लिए भी यह फैसला अनिवार्य था। तथा यूपी से पहले कर्नाटक सरकार ने भी वीकेंड लॉकडाउन का फॉर्मूला अपनाना आरम्भ कर दिया है, कर्नाटक सरकार ने 2 अगस्त तक हर शनिवार और रविवार को सभी बाजार और दफ्तर बंद रखने का फैसला लिया है। जिसके बाद अब यूपी में भी हर हफ्ते लॉकडाउन रहेगा परंतु गौरतलब है कि, सरकार तो अपनी तरफ से पूरे प्रयास कर ही रही है कोविड-19 महामारी के संक्रमण को रोकने के लिए लेकिन जब तक आम जनता जागरूक नहीं होगी एंव एहतियातन नहीं बरतेगी तब तक कोरोना का संक्रमण रुकने वाला नहीं है।
क्योंकि अब इस वायरस से लड़ाई समूचे जनता को लड़नी है और अब कोरोना हर जिले, कस्बे, शहर, राज्य या यूं कहें भारत के हर कोने तक अपने पैर पसारता जा रहा है। और कोरोना वायरस संक्रमितों के मामलों को देखते हुए यह स्पष्ट हो गया है कि इस वायरस से लड़ाई कुछ दिन की नहीं है बल्कि यह लड़ाई काफी लंबी चलेगी। तो ऐसे में जरूरी है कि लोग सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क व अन्य गाइडलाइन का जरूर पालन करें।
-निधि जैन
यह भारत में पहला ऐसा मौका आया है जब मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च, ऑफिस, कारखाने, दुकाने, फैक्ट्रियां इत्यादि इतने ज्यादा दिनों के लिए बंद हुई हैं। और अभी भी कुछ नहीं पता की यह वायरस का प्रकोप भारत में कब खत्म होगा क्योंकि प्रतिदिन कोरोना संक्रमितों के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं। जिसके कारण ही सरकार को बार-बार लॉकडाउन घोषित करना पड़ रहा है।
लॉकडाउन-1, लॉकडाउन-2, अनलॉक-1 इत्यादि के फार्मूले सरकार अपना रही है। जिसके बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार ने वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए एक ओर नए प्लान पर काम शुरू कर दिया है। अब यूपी सरकार कोरोना से निपटने के लिए वीकेंड लॉकडाउन फॉर्मूला लागू कर रही है। कोविड़-19 के संक्रमण को रोकने के लिए अब यूपी में हर हफ्ते वीकेंड लॉकडाउन लगेगा। यानी शनिवार और रविवार को लॉकडाउन रहेगा। जिसके मुताबिक सभी बाजार और दफ्तर भी बंद रहेंगे। इसका मतलब प्रदेश में सभी बाजार और दफ्तर हफ्ते में केवल पांच दिन ही खुलेंगे। कोरोना संकट से निपटने के लिए यह नया प्लान लागू करने का फैसला ले लिया गया है। वीकेंड पर लॉकडाउन लगाने का यह फैसला सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई टीम इलेवन की बैठक में लिया गया है। व वायरस के संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए ट्रांसमिशन चेन तोड़ने के लिए भी यह फैसला अनिवार्य था। तथा यूपी से पहले कर्नाटक सरकार ने भी वीकेंड लॉकडाउन का फॉर्मूला अपनाना आरम्भ कर दिया है, कर्नाटक सरकार ने 2 अगस्त तक हर शनिवार और रविवार को सभी बाजार और दफ्तर बंद रखने का फैसला लिया है। जिसके बाद अब यूपी में भी हर हफ्ते लॉकडाउन रहेगा परंतु गौरतलब है कि, सरकार तो अपनी तरफ से पूरे प्रयास कर ही रही है कोविड-19 महामारी के संक्रमण को रोकने के लिए लेकिन जब तक आम जनता जागरूक नहीं होगी एंव एहतियातन नहीं बरतेगी तब तक कोरोना का संक्रमण रुकने वाला नहीं है।
क्योंकि अब इस वायरस से लड़ाई समूचे जनता को लड़नी है और अब कोरोना हर जिले, कस्बे, शहर, राज्य या यूं कहें भारत के हर कोने तक अपने पैर पसारता जा रहा है। और कोरोना वायरस संक्रमितों के मामलों को देखते हुए यह स्पष्ट हो गया है कि इस वायरस से लड़ाई कुछ दिन की नहीं है बल्कि यह लड़ाई काफी लंबी चलेगी। तो ऐसे में जरूरी है कि लोग सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क व अन्य गाइडलाइन का जरूर पालन करें।
-निधि जैन