क्यां 7 खून माफ किए जा सकते हैं?
क्या देरी से मिले न्याय को सच में न्याय माना जा सकता है? वर्षों की देरी के बाद अगर कोर्ट कानूनी तरीके से सही फैसला भी लेती है, तो कई न कई देरी की वजह से कई जीवन अवश्य ही प्रभावित हो जाते हैं। बहरहाल स्वतंत्र भारत में यानी वर्ष 1947 के बाद पहली बार किसी महिला को फांसी होने वाली है और एक मासूम बेटा है, जो अपने लिए मां का हक मांग रहा है। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में जहां शबनम नाम की एक लड़की ने अपने परिवार के सभी 7 लोगों की हत्या कर दी थी क्योंकि, वो अपने प्रेमी से शादी करना चाहती थी और घर वाले शादी के खिलाफ थे। शबनम को लगा कि अगर वह अपने घर वालों को रास्ते से हटा दे तो शादी भी हो जाएगी और घर की संपत्ति पर भी उसका कब्जा हो जाएगा, जिससे वो अपनी जिंदगी आराम से गुजार लेगी लेकिन शबनम अपराध के बाद अपने प्रेमी के साथ गिरफ्तार कर ली गई और उन दोनों को 2010 में अमरोहा की अदालत ने फांसी की सजा सुना दी थी।अदालत के इस मामले को अब लगभग 13 वर्ष बीत चुके हैं। शबनम ने दिसंबर 2008 में जेल में एक बेटे को जन्म दिया था। जिसके बाद अब ये कहानी उस बच्चे की भी है। वो बच्चा चाहता है कि देश का कानू...