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रजिस्ट्री योजना कारगर रहेगीं

 -By Nidhi Jain  देश में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या अब 18 लाख के भी पार पहुंच गई है। और भारत में कोरोना मरीजों का दैनिक आंकड़ा 50 हजार से भी अधिक है। ऐसे में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर अस्पतालों में भर्ती कोविड-19 मरीजों की रजिस्ट्री बनाने की योजना पर विचार कर रही है।अधिकारियों का कहना है कि, आईसीएमआर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और एम्स के साथ मिलकर राष्ट्रीय नैदानिक रजिस्ट्री बनाने पर विचार कर रहे है। जो अनुसंधानकर्ताओं और नीति निर्माताओं को कोविड-19 के रोगियों के इलाज के लिए जांच उपचारों की प्रभावशीलता, प्रतिकूल प्रभावों को समझने और इलाज में सुधार लाने के लिए साक्ष्य उत्पन्न करने में भी सहायता करेगी। तथा इस लक्ष्य से अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों का भी आंकड़ा एकत्र रहेगा। जिनमें नैदानिक और प्रयोगशाला संबंधी विशेषताएं, उनकी जनसांख्यिकी, अन्य गंभीर बीमारियां, इलाज के नतीजे, सभी आयु वर्ग में जटिलताएं आदि शामिल होंगे। एंव सार्स-सीओवी-2 और इसके कारण होने वाली बीमारी के इतने अज्ञात मापदंड हैं जो इसकी उचित समझ और बीमारी के प्रबंधन में एक बाधा हैं। व ...

करोड़ों खर्च कर रहें हैं वायरस फ्री देशों पर

 -By Nidhi Jain  कोरोना महामारी के दौर में न्यूज़ीलैंड ही एक अकेला ऐसा देश है जहां इस वर्ष नागरिकता की जानकारी लेने के मामलों में 65 फीसदी का उछाल आया है। इस वक्त लोगों में कोराना का खौफ बूरी तरह से बना हुआ है, जिससे लोग किसी भी तरह से बचना चाहते हैं। और अब अमीर लोग इस जानलेवा वायरस से खुद को सुरक्षित करनें के लिए करोड़ों खर्च करके वायरस फ्री न्यूज़ीलैंड देश की नागरिकता हासिल कर रहें हैं क्योंकि न्यूज़ीलैंड जैसे देशों ने बाकी देशों की तुलना में कोविड़-19 महामारी के खिलाफ काफी तेजी से कदम उठाया और उस पर काबू पाने में भी विजय हासिल की है। बीते महीनों करीब 80 हजार से भी अधिक अमेरिकियों ने यहां के पासपोर्ट को हासिल करने के लिए जानकारी मांगी है, जो इसी अवधि में पिछले साल की तुलना में 65 फीसदी अधिक है। व न्यूज़ीलैंड के अलावा कैरेबियाई देशों, माल्टा और ऑस्ट्रेलिया में भी इन अमीर लोगों की रूचि बड़ी है। लेकिन इन देशों में रहने के लिए काफी खर्च करना पड़ता है क्योंकि न्यूज़ीलैंड में रहने के लिए, काम करने और पढ़ाई के लिए कम से कम बीस लाख ड़ॉलर से लेकर एक करोड़ डॉलर तक का खर्च करना पड़ता ह...