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मार्च, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

भावनाएं हीन भाषाएं!

 -By Nidhi Jain  भारत में जहां औसतन 20 किलोमीटर के बाद भाषा और बोलियां बदल जाती हैं, वहीं अंग्रेज़ी भाषा का तो फ्यूचर ब्राइट नज़र आ रहा है, लेकिन भारतीय भाषाओं के मामले में यह स्थिति बहुत ख़राब है। 21 फरवरी को दुनियाभर में अंतरराष्‍ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया गया था। वर्ष 1999 में पहली बार संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNESCO ने इसे मनाने की घोषणा की थी और वर्ष 2000 से हर साल ये एक दिन मातृभाषा को समर्पित होता है परन्तु आज का कड़वा सच तो ये है कि हर 14 दिन में दुनिया में एक भाषा विलुप्त हो जाती है। हमारे देश में बच्चों को अंग्रेज़ी की कविता तो याद रहती है, लेकिन वो ही अपनी मातृभाषा में बोली जाने वाले कहानियों और कविताओं को याद नहीं रखते। अंग्रेज़ी बोलना, पढ़ना और लिखना एक स्‍टेटस सिंबल बन गया है। हिन्दी के नमस्ते से ज़्यादा हमें अंग्रेज़ी का शब्द हैलो बोलना अच्छा और कूल लगता है। वहीं हमारे ही समाज में ये बातें भी बोली जाती हैं कि अंग्रेज़ी सीख ली तो नौकरी भी मिल जाएगी और सम्मान भी जिसका स्पष्ट मतलब है कि आज अगर भाषाओं का विश्वयुद्ध हुआ तो भारत की हिन्दी, मराठी, गुजराती, बांग्ला, पंज...

एक दिन नहीं, समूचे वर्ष

 -by Nidhi jain  प्रतेक वर्ष 8 मार्च को विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्रेम प्रकट करते हुए इस दिन को महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य में उत्सव के तौर पर अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में, यह दिवस अपना राजनीतिक मूलस्वरूप पूर्ण रूप से खो चूका है, और अब यह मात्र महिलाओं के प्रति अपने प्यार को अभिव्यक्त करने हेतु एक तरह से मातृ दिवस और वेलेंटाइन डे की ही तरह बस एक अवसर बन कर रह गया हैं। वहीं कई जगहों पर यह दिन केवल कुछ राजनीतिक पार्टियों के लिए अवसर लेके आता है। बहरहाल हम हमेशा से इस बारे में बात करते है और आए है कि महिलाओं को उनके हक का मान-सम्मान मिले व वो भी अपनी जिंदगी खुलकर जीए एंव पुरुषों के बराबर ही उन्हें भी अधिकार मिले आदि कई बातों के लिए महिलाएं हमेशा से ही एक लंबी लड़ाई लड़ती आ रही है लेकिन अभी तक उनको वो सम्मान हमारे समाज में नहीं मिला है। गौरतलब है कि उस समाज में जहां प्रतिदिन रेप के केस बढ़ते जा रहे है वही लोग हर साल महिलाओं के प्रति आदर दिखाने का ढ़ोंग...